IPO ने मचाया तहलका! ₹485 का शेयर सीधे ₹620 पर खुला, पहले ही दिन निवेशकों की 'बल्ले-बल्ले'!

बाज़ार में एक नया सितारा! 'Rubicon Research' के शेयरों ने पहले ही दिन ज़बरदस्त शुरुआत की है। ₹485 के दाम पर जारी हुए शेयर सीधे 28% की उछाल के साथ खुले, जिससे निवेशकों को मोटा मुनाफ़ा हुआ। जानिए, क्या यह शेयर ग्रे मार्केट (बाज़ार) की उम्मीदों पर खरा उतरा या रह गया पीछे?

IPO ने मचाया तहलका! ₹485 का शेयर सीधे ₹620 पर खुला, पहले ही दिन निवेशकों की 'बल्ले-बल्ले'!

बाज़ार में 'धमाकेदार एंट्री'! रुबिकॉन रिसर्च के शेयरों ने पहले ही दिन दी 28% की छलांग!

शेयर बाज़ार में बुधवार, 16 अक्टूबर को 'Rubicon Research' के शेयरों ने शानदार शुरुआत की है। कंपनी के शेयर राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर ₹620 के दाम पर सूचीबद्ध हुए।

  • यह दाम ₹485 प्रति शेयर के निर्गम मूल्य (IPO प्राइस) से 27.84 प्रतिशत ज़्यादा है।

  • बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर भी शेयर लगभग इसी दाम पर यानी ₹620.10 पर सूचीबद्ध हुए।

  • पहले ही दिन कंपनी का बाज़ार पूंजीकरण (Market Capitalization) ₹10,216 करोड़ दर्ज किया गया।

ग्रे मार्केट की उम्मीदों पर नहीं उतरा खरा!

हालाँकि, यह धमाकेदार लिस्टिंग प्रीमियम, ग्रे मार्केट (अनौपचारिक बाज़ार) के अनुमानों से थोड़ा कम रहा।

  • शेयर बाज़ार में लिस्ट होने से पहले, 'इन्वेस्टरगेन' के आँकड़ों के अनुसार, कंपनी के अनलिस्टेड शेयर (जो बाज़ार में सूचीबद्ध नहीं हुए थे) निर्गम मूल्य से लगभग 30 प्रतिशत अधिक के ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) पर कारोबार कर रहे थे।

बाज़ार विशेषज्ञों का मानना है कि रुबिकॉन रिसर्च ने लिस्टिंग पर निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है, भले ही यह ग्रे मार्केट के सबसे ऊँचे अनुमान से थोड़ा ही चूका हो।

कंपनी क्या करती है? (व्यवसाय और विशेषता)

  • दवाइयों की खास कंपनी: रुबिकॉन रिसर्च लिमिटेड एक दवा बनाने वाली कंपनी है, लेकिन यह साधारण नहीं है। यह विशेष रूप से 'स्पेशियलिटी फॉर्मूलेशन' (विशेष प्रकार की दवाइयाँ) और 'ड्रग-डिवाइस कॉम्बिनेशन' (जैसे नाक में स्प्रे) बनाने पर ध्यान केंद्रित करती है।

  • रिसर्च पर ज़ोर: यह कंपनी नवाचार (इनोवेशन) और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर बहुत ज़्यादा पैसा खर्च करती है। यह बाज़ार में मौजूद कई अन्य दवा कंपनियों से कहीं ज़्यादा है, जिससे यह ऐसी दवाइयाँ बना पाती है जिनकी नक़ल करना मुश्किल होता है।

  • अमेरिका पर कब्ज़ा: कंपनी की ज़्यादातर कमाई संयुक्त राज्य अमेरिका (US) से होती है (लगभग 99% तक)। यह वहाँ के बड़े थोक विक्रेताओं और फार्मेसी चेन को अपनी दवाइयाँ बेचती है।

  • उत्पाद पोर्टफोलियो: इसके उत्पादों में खाने वाली गोलियाँ, तरल दवाइयाँ, आँखों की दवाइयाँ, और साँस से जुड़ी दवाइयाँ (नेज़ल और इनहेलेशन) शामिल हैं।

Rubicon Research IPO के पैसों का इस्तेमाल

  • कंपनी ने आईपीओ से जुटाए ₹500 करोड़ में से एक बड़ा हिस्सा (₹310 करोड़) क़र्ज़ चुकाने के लिए इस्तेमाल करने की योजना बनाई है।

  • बाकी रकम का उपयोग कंपनी नए अधिग्रहण (Acquisitions) और सामान्य कॉर्पोरेट ज़रूरतों को पूरा करने के लिए करेगी।

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