रेलवे की 'डिजिटल दादागिरी'! यात्री का हक़ छीना, अब यात्रा की तारीख बदलना हुआ नामुमकिन?

रेलवे के आरक्षण खिड़कियों पर 'डिजिटल भुगतान' को बढ़ावा देने के नए नियम ने यात्रियों को परेशानी में डाल दिया है। पहले ₹20 देकर यात्रा की तारीख बदलना आसान था, पर अब डिजिटल पेमेंट से यह सुविधा लगभग खत्म हो गई है! अब टिकट रद्द करो, ₹120 का जुर्माना भरो, फिर नया टिकट कटाओ! जानिए रेलवे के इस 'डिजिटल दबाव' से जुड़ी पूरी ख़बर।

रेलवे की 'डिजिटल दादागिरी'! यात्री का हक़ छीना, अब यात्रा की तारीख बदलना हुआ नामुमकिन?

रेलवे का 'डिजिटल धक्का'! अब तारीख बदलना हुआ भारी, यात्रियों का हक़ छीना?

रेलवे ने अपनी सभी खिड़कियों पर अब डिजिटल लेन-देन (Digital transaction) को अनिवार्य करना शुरू कर दिया है, जिसकी वजह से रेलवे के कर्मचारियों और आम जनता के एक वर्ग में चिंता पैदा हो गई है। पार्सल खिड़कियों पर तो यह बदलाव सफल रहा, जहाँ ज़्यादातर ग्राहकों ने डिजिटल भुगतान को आसानी से अपना लिया।

आरक्षण खिड़की पर उलझन!

लेकिन, आरक्षण (रिजर्वेशन) खिड़कियों पर डिजिटल तरीके को अपनाने से कुछ भ्रम और तकनीकी समस्याएँ खड़ी हो गई हैं। एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी के अनुसार, जो यात्री नकद भुगतान करके टिकट खरीदते थे, उनके पास यह सुविधा थी कि वे यात्रा से 48 घंटे पहले तक मात्र ₹20 का शुल्क देकर अपनी यात्रा की तारीख बदल सकते थे।

सुविधा खत्म, जेब पर बोझ बढ़ा!

डिजिटल भुगतान प्रणाली शुरू होने के बाद, अब यह सुविधा खत्म हो गई है। विभिन्न श्रेणी के लिए निर्धारित शुल्क का भुगतान करके अब आप तारीख नहीं बदल सकते।

  • इसके बजाय, यात्री को अपना टिकट रद्द (कैंसिल) करना होगा।

  • इसके लिए उसे ₹120 प्रति टिकट (स्लीपर क्लास) का जुर्माना देना होगा।

  • फिर, दूसरी तारीख के लिए नया टिकट बुक करना होगा।

इस प्रक्रिया में, रद्द किए गए टिकट का पैसा यात्री के खाते में देर से जमा होता है, जिसका मतलब है कि नया टिकट बुक करने के लिए यात्री को अधिक नकद साथ लेकर चलना पड़ेगा।

नकद भुगतान बेहतर क्यों?

नकद लेन-देन वाली पुरानी व्यवस्था में, अगर टिकट रद्द होता था, तो पैसा तुरंत वापस मिल जाता था। अगर 48 घंटे की समय सीमा निकल जाने के बाद भी तारीख बदलनी हो, तो यात्री को केवल रद्दीकरण शुल्क ही जेब से देना पड़ता था। यही कारण है कि पुराने यात्री आज भी नकद देकर टिकट बुक करना पसंद करते हैं।

सामान्य टिकट पर भी घर्षण

इसी तरह, रेलवे की ओर से सामान्य टिकट (जनरल टिकट) खिड़कियों पर नकद लेन-देन को हतोत्साहित करने के फैसले से उन यात्रियों में निराशा है जो आज भी अपने दैनिक लेन-देन के लिए नकदी पर निर्भर हैं। 'अनारक्षित टिकट प्रणाली (यूटीएस)' से टिकट खरीदने वाले लगभग 10 प्रतिशत यात्री आज भी नकद का ही उपयोग करते हैं।

रेलवे बोर्ड का रुख

हालांकि, रेलवे अधिकारियों ने साफ़ किया है कि यह फैसला रेलवे बोर्ड ने लिया है। इसका मतलब यह नहीं है कि आम जनता को नकद लेन-देन का विकल्प मना कर दिया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी कहा कि अगर डिजिटल लेन-देन में कोई कमी है, तो उसे बाद में सुधारा जा सकता है।

केवल तिरुवनंतपुरम डिविजन में ही औसतन हर दिन 1.1 लाख सामान्य टिकट जारी होते हैं।

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